राजीव एक मशहूर क्राइम थ्रिलर नॉवलिस्ट था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वह लिख नहीं पा रहा था। प्रेरणा की तलाश में वह दिल्ली से दूर, एक पहाड़ी इलाके में बने पुराने गेस्ट हाउस में रहने चला गया — "सिल्वर रॉक हाउस"।
गेस्ट हाउस सुंदर था, लेकिन कुछ तो अजीब था वहां…
हर कमरा खुला था, बस "कमरा नंबर 7" पर एक तख्ती लगी थी:
"प्रवेश वर्जित"
"Enter at your own risk"
राजीव लेखक था… और लेखक जितना संवेदनशील होता है, उतना ही जिज्ञासु भी।
एक रात, बर्फीली हवाओं में जब सब सो रहे थे, राजीव के कमरे के सामने से किसी के चलने की आवाज़ आई।
"खट... खट... खट..."
राजीव ने झांक कर देखा…
कोई सफेद साड़ी में महिला कमरे नंबर 7 की ओर जा रही थी।
राजीव ने रिसेप्शन पर पूछा —
"कमरा नंबर 7 में कौन है?"
मैनेजर ठंडी साँस लेते हुए बोला:
"साहब, वो कमरा 15 साल से बंद है... उस रात के बाद से..."
"कौन-सी रात?" राजीव ने पूछा।
"जिस रात वहाँ एक लड़की की लाश मिली थी… और उसका मर्डर कभी सॉल्व नहीं हुआ…"
राजीव ने फैसला किया — उस कमरे की सच्चाई उसे जाननी है। अगली रात, उसने चुपचाप कमरा नंबर 7 की चाबी चुरा ली…
दरवाज़ा खोला...
धूल... पुरानी किताबें... और दीवारों पर खून के धब्बे।
फिर… एक पुराना टेप रिकॉर्डर मिला। उसने प्ले किया —
"अगर तुम ये सुन रहे हो, तो मैं मारी जा चुकी हूँ..."
आवाज़ उसी लड़की की थी जिसे राजीव ने रात में देखा था!
अचानक दरवाज़ा बंद हो गया…
कमरे में अंधेरा… मोबाइल काम नहीं कर रहा…
और एक धीमी आवाज़… कान के पास…
"अब तुम मेरी कहानी का हिस्सा बन चुके हो…"
अगले दिन सुबह… गेस्ट हाउस में एक नया मेहमान आया।
रजिस्टर में देखा…
कमरा नंबर 7 के सामने लिखा था:
"राजीव वर्मा – Writer – Missing"
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