अविश्वसनीय चमत्कार: कैसे विष्णु भगवान की कृपा ने गरीब भक्त हरीराम का जीवन बदल दिया Betalpachissi ki Hindi Kahaniyan

विष्णु भगवान की कृपा

एक समय की बात है, राजा विक्रमादित्य के दरबार में बेताल अक्सर अपनी कथाएँ सुनाते थे। एक शाम, जब राजा ने पूछा, “हे बेताल, क्या तुम मुझे कोई ऐसी कथा सुनाओगे जिसमें विष्णु भगवान की अनंत कृपा का वर्णन हो?” बेताल मुस्कुराते हुए बोले, “राजन्, सुनो – यह कथा है एक गरीब, पर अत्यंत भक्त हरीराम की, जिसके जीवन में विष्णु की कृपा ने चमत्कार कर डाला।”

अविश्वसनीय चमत्कार: कैसे विष्णु भगवान की कृपा ने गरीब भक्त हरीराम का जीवन बदल दिया

कठिनाई का दौर

हरीराम एक छोटे से गाँव में रहता था। उसका जीवन गरीबी से झुंझलाया हुआ था, किंतु उसका मन भगवान विष्णु की आराधना में सदैव लीन रहता था। उसके पास कुछ भी भौतिक सुख नहीं थे, पर उसके दिल में श्रद्धा की अपार ज्योति जल रही थी। एक साल, जब उसके गाँव में अकाल पड़ा, उसकी फसलें सूखकर मुरझा गईं और गाँव के कष्ट में सब डूबने लगे। उस कठिन समय में, कर्ज़ी से परेशान गाँव वालों ने हरीराम की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया। पर हरीराम ने कभी अपनी भक्ति न छोड़ी। वह दिन-रात विष्णु के नाम का जाप करता और प्रार्थना करता रहा।

न्याय का मुक़दमा

जब गाँव के प्रधान ने हरीराम को अदालत में पेश किया, तो सभी लोग उसकी हालत देखकर दयालु हो गए। पर कर्ज़ी और अत्याचार की भरमार के कारण उस पर गंभीर मामला चल रहा था। अदालत में उसे दोषी ठहराने का आदेश दिया गया था। उसी क्षण, हरीराम ने आँखें बंद कर सच्चे मन से विष्णु का स्मरण किया – “हे विष्णु, मेरे सच्चे भक्त की रक्षा कर, तू ही मेरे भले का कारण बन।”

चमत्कारिक दृश्य

जब न्यायालय में हरीराम के बोल सुनने लगे, तभी आसमान में घनघोर बादल छा गए। एक अद्भुत प्रकाश की किरणें आसमान से उतर कर हरीराम के ऊपर फैल गईं। सभी न्यायाधीशों की आँखें खुली की खुली रह गईं। वातावरण में ऐसा लगा जैसे भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हो गए हों। उस दिव्य प्रकाश के आगे, अदालत के मुखिया ने तुरंत हरीराम की पापमुक्ति घोषित कर दी और उसकी जमीन उसे लौटा दी गई। गाँव वालों में खुशी की लहर दौड़ गई और हरीराम का जीवन फिर से खुशहाली में लौट आया।

मोरल और संदेश

बेताल ने राजा विक्रमादित्य से कहा, “राजन्, देखो – हरीराम की अटल भक्ति और निरंतर विष्णु के नाम का जाप, अंततः भगवान की अनंत कृपा का कारण बन गया। कठिनाइयों में भी यदि मन सत्यभक्ति में डूबा रहे, तो प्रभु की कृपा अवश्य ही उस पर बनकर रहती है।”
राजा विक्रमादित्य ने इस कथा से यह संदेश ग्रहण किया कि धर्म, भक्ति और सच्चाई के मार्ग पर चलने से कोई भी विपत्ति कठिन नहीं होती और भगवान हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

इस प्रकार “विष्णु भगवान की कृपा” की यह कथा न केवल हरीराम के जीवन परिवर्तन का वर्णन करती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से भगवान विष्णु की अनंत कृपा हम सभी पर बनी रहती है।

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